भारत में E85 पेट्रोल ₹82.12/लीटर पर लॉन्च हुआ। जानिए इसका मिश्रण, सरकार ने यह कदम क्यों उठाया, एथनॉल सप्लायर कौन हैं और वाहनों को होने वाले नुकसान।
भारत ने क्यों उठाया E85 का कदम?
केंद्र सरकार ने तीन मुख्य राष्ट्रीय रणनीतियों के तहत E85 ईंधन को देश में उतारा है:
- वैश्विक कच्चे तेल के संकट से सुरक्षा: अंतरराष्ट्रीय युद्ध और तेल बाजार के उतार-चढ़ाव से भारतीय आम उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना।
- किसानों की आय में वृद्धि: विदेशी तेल आयात पर होने वाले भारी खर्च को रोककर उसे भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मोड़ना। यदि देश के 50% नए वाहन भी फ्लेक्स-फ्यूल पर आ जाते हैं, तो करीब ₹12,403 करोड़ सीधे भारतीय किसानों के पास पहुंचेंगे।
- प्रदूषण में भारी कमी: E85 पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को 61% तक कम करता है। इसका ऑक्टेन नंबर बहुत अधिक (~108 RON) होता है, जिससे ईंधन पूरी तरह जलता है और हानिकारक धुंआ न के बराबर निकलता है।
यह एथनॉल कहां से आ रहा है और इसके निर्माता कौन हैं?
भारत में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल-ग्रेड एथनॉल पूरी तरह से स्वदेशी कृषि उत्पादों से बनाया जा रहा है। इसे मुख्य रूप से इनसे तैयार किया जाता है:
- गन्ने का रस और भारी शीरा (B-heavy molasses)
- खराब या सरप्लस हो चुके अनाज और मक्का
इसे देश की बड़ी चीनी और बायो-एनर्जी कंपनियां बनाती हैं और सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, HPCL, BPCL) को सप्लाई करती हैं। भारत में प्रमुख एथनॉल प्रदाता निम्नलिखित हैं:
- बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड: उत्तर प्रदेश में स्थित भारत के सबसे बड़े एथनॉल और चीनी उत्पादकों में से एक।
- ई.आई.डी.-पैरी इंडिया: दक्षिण भारत (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक) में बड़े स्तर पर डिस्टिलरी चलाने वाली दिग्गज कंपनी।
- धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स लिमिटेड: गन्ने के प्रसंस्करण से आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल एथनॉल बनाने वाली अग्रणी कंपनी।
कीमत, मिश्रण और उपलब्धता
- लॉन्च कीमत: दिल्ली में ₹82.12 प्रति लीटर, जो नियमित E20 पेट्रोल से पूरे ₹20 सस्ता है।
- मिश्रण (Composition): इसमें 80-85% बायो-एथनॉल और 15-20% पारंपरिक पेट्रोल का मिश्रण होता है।
- उपलब्धता: शुरुआती दौर में दिल्ली और महाराष्ट्र के 48 चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर इसकी बिक्री शुरू हुई है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक 500 आउटलेट और 2027 तक 5,000 आउटलेट तैयार करना है।
E20 पेट्रोल बनाम E85: तुलनात्मक अंतर
| विशेषता | सामान्य E20 पेट्रोल | नया E85 ईंधन |
| एथनॉली मात्रा | 20% | 85% |
| ऑक्टेन रेटिंग | कम (~91 RON) | बहुत उच्च (~108 RON) |
| कीमत | सामान्य बाजार दर | ₹20 प्रति लीटर सस्ता |
| माइलेज (औसत) | सामान्य मानक | 25% से 35% तक की बड़ी गिरावट |
वाहनों के लिए नुकसान और सावधानियां
- इंजन की खराबी का सख्त डर: इस ईंधन को अपनी सामान्य पेट्रोल कार या बाइक में भूलकर भी न डालें। यह केवल उन्हीं गाड़ियों के लिए सुरक्षित है जिनपर कंपनी से Flex-Fuel Vehicle (FFV) का टैग लगा हो।
- माइलेज में बड़ी कमी: एथनॉल की ऊर्जा क्षमता कम होने के कारण E85 पर चलने वाले वाहनों का माइलेज 25% से 35% तक कम हो जाता है। यानी सस्ती कीमत के बावजूद गाड़ी कम दूरी तय करेगी।
- जंग का खतरा: एथनॉल हवा से नमी (पानी) सोखता है। सामान्य गाड़ियों में इस्तेमाल करने पर यह लोहे की टंकियों में जंग लगा देता है और फ्यूल पाइप व रबर सील को गला देता है।
- कोल्ड स्टार्ट की समस्या: सर्दियों या भारी बारिश में एथनॉल जल्दी गैस (वाष्प) नहीं बनता, जिससे सुबह के समय गाड़ी स्टार्ट करने में ज्यादा समय लग सकता है।
- वाहनों की ऊंची लागत: जंग-रोधी पुर्जों और विशेष एथनॉल सेंसर के कारण फ्लेक्स-फ्यूल बाइक ₹6,000 और कारें ₹50,000 से ₹1,00,000 तक महंगी आती हैं।

