गणतंत्र मंडप में भव्य समारोह
असम की कला, संस्कृति और सामाजिक योगदान को राष्ट्रीय मंच पर एक बड़ी पहचान मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के गरिमामयी ‘गणतंत्र मंडप’ में आयोजित इस वर्ष के पहले नागरिक अलंकरण समारोह (Civil Investiture Ceremony) में असम की पांच उत्कृष्ट हस्तियों को पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया।
इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित देश के तमाम शीर्ष नेता मौजूद रहे। वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रपति ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी थी, जिसमें पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। इस बार के पुरस्कारों में उन ‘अनाम नायकों’ (Unsung Heroes) को प्राथमिकता दी गई है जिन्होंने बिना किसी प्रचार के समाज के लिए काम किया है। इस सूची में असम पूर्वोत्तर क्षेत्र से सबसे अधिक पुरस्कार पाने वाला राज्य बनकर उभरा है।
पद्म श्री से सम्मानित असम के नायक
सम्मानित होने वाले पांचों नाम अपने-अपने क्षेत्रों में दशकों की साधना और सेवा के प्रतीक हैं:
- हरिचरण सैकिया (कला): वयोवृद्ध सत्रीया (Sattriya) नृत्य प्रतिपादक, जिन्होंने असम की इस शास्त्रीय नृत्य परंपरा को सहेजने और वैश्विक पहचान दिलाने में जीवन समर्पित कर दिया।
- नुरुद्दीन अहमद (कला): विख्यात मूर्तिकार और कला निर्देशक, जिन्हें अपनी भव्य पारंपरिक कलाकृतियों और शिल्प कौशल के लिए जाना जाता है।
- योगेश देउरी (विज्ञान एवं इंजीनियरिंग / कृषि): असम के पारंपरिक रेशम उद्योग (Silk Industry) के विशेषज्ञ, जिन्होंने स्थानीय बुनकरों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कई वैज्ञानिक प्रयास किए।
- पोकिला लेक्थेपी (कला): कारबी लोक संगीत (Karbi Folk Music) की जमीनी कलाकार, जिन्होंने अपनी जनजातीय संस्कृति और मौखिक संगीत परंपरा को जीवित रखा है।
- कबीन्द्र पुरकायस्थ (मरणोपरांत – सार्वजनिक मामले): पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ राजनेता, जिन्हें क्षेत्र के विकास और जनसेवा में उनके आजीवन योगदान के लिए मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया।
पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों को भी सम्मान
असम के अलावा पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के भी कई जमीन से जुड़े दिग्गजों को राष्ट्रपति ने सम्मानित किया:
- नागालैंड: सांगयुसांग एस. पोंगनेर
- अरुणाचल प्रदेश: तेची गुबिन
- मणिपुर: युमनम जात्रा सिंह
- त्रिपुरा: नरेश चंद्र देव वर्मा
- मेघालय: हैली वार

