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बजट संक्रमण: असम सरकार ने दाल, चीनी और नमक पर मिलने वाली सब्सिडी योजना को अस्थायी रूप से रोका

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Last updated: सोम, 1 जून 2026 07:59 अपराह्न IST
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Published: जून 1, 2026
Assam Temporarily Suspends Subsidised Dal, Sugar, And Salt Scheme
Assam Temporarily Suspends Subsidised Dal, Sugar, And Salt Scheme (PC: Social Media Sites)
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गुवाहाटी — असम सरकार ने अपनी प्रमुख सार्वजनिक वितरण पहल “किफायती मसूर दाल, चीनी और नमक आपूर्ति” योजना को दो महीने के लिए अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की है। जून 2026 से प्रभावी होने वाले इस आदेश के तहत, पूरे राज्य में अत्यधिक रियायती दरों पर दी जाने वाली इन तीन आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामले विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह रोक एक सामान्य प्रशासनिक कदम है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद सरकार के वित्तीय बदलाव और बजट व्यवस्था के कारण यह निर्णय लेना पड़ा है।

निलंबन का मुख्य कारण: लेखानुदान (Vote-on-Account) बजट

इस योजना को अस्थायी रूप से रोकने का सीधा संबंध राज्य में चल रही अंतरिम वित्तीय व्यवस्था से है। फरवरी में हुए राज्य विधानसभा चुनावों से पहले, तत्कालीन वित्त मंत्री अजंता नेओग ने अंतरिम अवधि के लिए आवश्यक सरकारी खर्चों और सार्वजनिक सेवाओं को जारी रखने के लिए ₹62,294.78 करोड़ का लेखानुदान (Vote-on-Account) बजट पेश किया था।

चूंकि उस अंतरिम बजट के तहत वित्तीय प्रावधान केवल मई 2026 तक के लिए ही आवंटित किए गए थे, इसलिए इस विशेष सब्सिडी योजना के लिए मिलने वाला फंड फिलहाल समाप्त हो गया है। राज्य आपूर्ति विभाग ने स्थानीय समाचार पत्रों में एक सार्वजनिक सूचना जारी कर बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूर्ण बजट जुलाई 2026 में नई सरकार द्वारा पेश किया जाएगा।

“नई सरकार जुलाई में पूर्ण बजट पेश करेगी और इसके पारित होने के बाद, यह योजना अगस्त से दोबारा शुरू हो जाएगी,” आधिकारिक विभागीय अधिसूचना में कहा गया है।

राशन कार्ड धारकों और खुले बाजार की कीमतों पर प्रभाव

इस दो महीने के निलंबन से असम के लगभग 70 लाख राशन कार्ड धारकों के मासिक घरेलू बजट पर अस्थायी असर पड़ने की संभावना है।

कम आय वाले परिवारों को वित्तीय राहत देने के लिए शुरू की गई इस कल्याणकारी योजना के तहत, लाभार्थियों को बेहद कम कीमतों पर निश्चित मासिक कोटा खरीदने का अधिकार था:

  • मसूर दाल: ₹60 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर उपलब्ध थी।
  • चीनी: ₹30 प्रति किलोग्राम की दर पर दी जा रही थी।
  • नमक: ₹10 प्रति किलोग्राम की दर पर मिल रहा था।

जून और जुलाई में सब्सिडी अस्थायी रूप से रुकने के कारण, पात्र परिवारों को ये वस्तुएं खुले बाजार से वर्तमान खुदरा कीमतों पर खरीदनी होंगी।

बचे हुए स्टॉक का वितरण और मुफ्त चावल की निरंतर आपूर्ति

गरीब परिवारों पर पड़ने वाले तत्काल प्रभाव को कम करने के लिए, सरकार ने सभी स्थानीय उचित मूल्य (Fair Price) की दुकानों को अपने मौजूदा इन्वेंट्री (स्टॉक) को खाली करने का निर्देश दिया है। यदि किसी डीलर या राशन दुकान के पास मई वितरण चक्र से बची हुई मसूर दाल, चीनी या नमक का स्टॉक उपलब्ध है, तो वे जून में उसे गरीब परिवारों को वितरित कर सकते हैं।

정 सरकार ने दृढ़ता से इस बात पर जोर दिया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के मुख्य घटकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत मिलने वाले मासिक मुफ्त चावल का वितरण पूरी तरह से निर्बाध जारी रहेगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि राज्य के 2.49 करोड़ से अधिक नागरिकों के लिए बुनियादी खाद्यान्न की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी।

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