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भारत में बाल विवाह और घरेलू हिंसा के मामलों में भारी गिरावट, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में संकट बरकरार

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Last updated: शनि, 30 मई 2026 07:49 अपराह्न IST
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Published: मई 30, 2026
India Records Progress Against Child Marriage, Gender Violence
India Records Progress Against Child Marriage, Gender Violence (PC: Social Media Sites)
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नई दिल्ली — हाल के वर्षों में बाल विवाह की दरों में आई तेज गिरावट और घरेलू हिंसा में कमी के चलते भारत ने सामाजिक और लैंगिक विकास संकेतकों (gender development indicators) में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। हालांकि, नए आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच अभी भी एक बड़ा अंतर है। इसके अलावा, किशोरियों के स्वास्थ्य और कम उम्र में मां बनने के मामलों में स्थिति जस की तस बनी हुई है, जो यह दिखाता है कि तमाम कानूनी और सामाजिक प्रयासों के बावजूद बुनियादी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।

मुख्य आंकड़े: एक नज़र में

संकेतक (Indicators)राष्ट्रीय रुझान / आंकड़ेनिरंतर चुनौतियाँ
बाल विवाहगिरकर 20.1% हुआ (18 वर्ष से पहले विवाह करने वाली 20-24 आयु वर्ग की महिलाएं)ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी दर अब भी काफी अधिक है
घरेलू/वैवाहिक हिंसादेशव्यापी स्तर पर कुल मामलों में गिरावट दर्ज की गईग्रामीण परिवारों में स्थिति अब भी चिंताजनक है
यौन हिंसा (18 वर्ष से कम)मामलों में मापने योग्य कमी देखी गईग्रामीण क्षेत्रों में रिपोर्टिंग की कमी और सुरक्षा का अभाव
किशोरी मातृत्व (Adolescent Motherhood)आंकड़े स्थिर बने हुए हैं (कोई बदलाव नहीं)प्रजनन स्वास्थ्य और जागरूकता के मोर्चे पर भारी कमी

आंकड़ों का विश्लेषण

1. बाल विवाह में ऐतिहासिक गिरावट

इस नए डेटा की सबसे बड़ी राहत देने वाली बात बाल विवाह के मामलों में आई कमी है। 20 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की ऐसी युवतियों का प्रतिशत, जिनका विवाह कानूनी उम्र (18 वर्ष) से पहले हो गया था, अब घटकर 20.1% पर आ गया है। यह गिरावट लड़कियों की शिक्षा में सुधार, महिला साक्षरता दर बढ़ने और बाल विवाह निषेध अधिनियम के कड़े पालन का परिणाम है।

2. लैंगिक हिंसा में कमी

विवाह की उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में भी कमी देखी गई है। पति या साथी द्वारा की जाने वाली हिंसा (Spousal Violence) और 18 वर्ष की आयु से पहले होने वाली यौन हिंसा, दोनों के मामलों में देश स्तर पर कमी आई है। विशेषज्ञ इसका श्रेय युवतियों में बढ़ती आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता को देते हैं।

3. कम उम्र में मां बनने के आंकड़े अभी भी स्थिर

बाल विवाह में कमी के बावजूद, किशोरी मातृत्व (Adolescent Motherhood) की दर स्थिर बनी हुई है। यानी कम उम्र में मां बनने वाली लड़कियों की संख्या में कोई खास गिरावट नहीं आई है। यह स्थिति दर्शाती है कि भले ही 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों की संख्या कम हुई हो, लेकिन जो लड़कियां इस चक्र में फंस जाती हैं (या अविवाहित किशोरियां), उन्हें आज भी परिवार नियोजन के साधनों, यौन शिक्षा और अपने शरीर पर आत्मनिर्भरता के अधिकारों की भारी कमी का सामना करना पड़ता है।

शहरी बनाम ग्रामीण अंतर: एक बड़ी दीवार

इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत में विकास की रफ्तार दो अलग-अलग गतियों से चल रही है। जहां एक ओर शहरी इलाके पुरानी रूढ़िवादी सामाजिक-आर्थिक प्रथाओं को तेजी से पीछे छोड़ रहे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह और घरेलू हिंसा दोनों की दरें आज भी बहुत अधिक हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • आर्थिक सुरक्षा का अभाव: ग्रामीण परिवार आर्थिक संकटों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जहां परिवार का वित्तीय बोझ कम करने के लिए आज भी बाल विवाह को एक पारंपरिक रास्ते के रूप में देखा जाता है।
  • न्याय और स्वास्थ्य तक पहुंच की कमी: ग्रामीण महिलाओं को कानून प्रवर्तन (पुलिस) या स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे तक पहुंचने में सामाजिक और भौगोलिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे वहां प्रताड़ना के मामले आसानी से सामने नहीं आ पाते।

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