लंदन / न्यू यॉर्क :
चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्रांति देखी जा रही है। वैज्ञानिकों ने कैंसर से लड़ने वाली उन्नत CAR-T सेल थेरेपी का उपयोग करके ल्यूपस (Lupus), मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) और रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी गंभीर ऑटोइम्यून बीमारियों को जड़ से शांत करने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है।
अब तक इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को जीवनभर भारी स्टेरॉयड और ऐसी दवाएं लेनी पड़ती थीं जो उनके इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देती थीं। लेकिन यह नई थेरेपी मरीजों को “लॉन्ग-टर्म रिमिशन” (लंबे समय तक बीमारी के लक्षणों का गायब होना) दे रही है।
कैसा होता है यह ‘इम्यून रीसेट’?
मेडिकल रिपोर्टों के अनुसार, डॉक्टरों की टीम मरीज के शरीर से टी-सेल्स (T-cells) निकालती है और लैब में उन्हें जेनेटिकली मॉडिफाई करती है। ये संशोधित सेल्स शरीर में वापस जाकर उन खराब बी-सेल्स (B-cells) को चुन-चुनकर नष्ट कर देती हैं जो मरीज के अपने ही अंगों पर हमला कर रहे थे।
हाल ही में हुए ‘CASTLE’ क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों से पता चला है कि Zorpo-cel नामक प्रायोगिक दवा की सिर्फ एक खुराक से मरीज 24 हफ्तों के भीतर पूरी तरह से सामान्य हो गए और उनकी सभी पुरानी दवाएं बंद करा दी गईं। यूरोपीय वैज्ञानिकों ने तो एक ऐसे मरीज को पूरी तरह ठीक करने का दावा किया है जो एक साथ तीन जानलेवा ऑटोइम्यून बीमारियों से जूझ रहा था।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
हालांकि, यह तकनीक अभी बहुत महंगी है क्योंकि इसे हर मरीज के खून के हिसाब से अलग से तैयार किया जाता है। फार्मास्युटिकल कंपनियां अब इसकी लागत कम करने और रेडीमेड “ऑफ-द-शेल्फ” (off-the-shelf) थेरेपी विकसित करने में जुटी हैं ताकि इसे आम जनता तक आसानी से पहुंचाया जा सके।

