त्रिपुरा बिजली दरें संशोधित: TERC ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नए टैरिफ को दी मंजूरी

Tripura Power Tariffs Revised For Fy 2026–27
Tripura Power Tariffs Revised For Fy 2026–27 (PC: Social Media Sites)

बिजली क्षेत्र की व्यापक समीक्षा

त्रिपुरा के ऊर्जा बुनियादी ढांचे से जुड़े एक बड़े विनियामक घटनाक्रम में, त्रिपुरा विद्युत नियामक आयोग (TERC) ने आधिकारिक तौर पर वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए नया टैरिफ आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश त्रिपुरा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TSECL) द्वारा दायर ‘मल्टी-ईयर टैरिफ’ (MYT) याचिका पर लंबी जनसुनवाई और सलाहकार समिति की बैठकों के बाद अंतिम रूप दिया गया है।

चूंकि TSECL बिजली उत्पादन (Generation), पारेषण (Transmission) और वितरण (Distribution) तीनों क्षेत्रों को खुद संभालती है, इसलिए आयोग ने इन तीनों व्यावसायिक श्रेणियों के खातों की गहनता से जांच की। अंतिम आदेश में राज्य की बिजली उपयोगिता की वित्तीय स्थिरता और आम जनता के लिए वहनीयता दोनों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक भारी बोझ न पड़े।

वित्तीय गणित: पुराना घाटा और किश्तों में वसूली

इस विनियामक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वित्तीय वर्ष 2024–25 का ‘ट्रूइंग अप’ (Truing Up) था, जिसके तहत आयोग ने कंपनी के पिछले अनुमानों के मुकाबले उसके वास्तविक परिचालन खर्चों और राजस्व का मिलान किया।

  • भारी घाटा: प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों, मुद्रास्फीति के दबाव और महंगी बिजली खरीद के कारण TSECL ने ₹17.09 बिलियन के संचित राजस्व घाटे का अनुमान लगाया था।
  • 43% बढ़ोतरी का प्रस्ताव खारिज: इस घाटे को तुरंत पाटने के लिए कंपनी ने कुल ₹21.64 बिलियन के राजस्व की आवश्यकता बताई थी, जिससे बिजली दरों में 43% की भारी बढ़ोतरी हो जाती और साथ ही एक अतिरिक्त ‘नियामक अधिभार’ (Regulatory Surcharge) भी जुड़ जाता।
  • चरणबद्ध तरीके से राहत: सुप्रीम कोर्ट और अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) के निर्देशों का पालन करते हुए, TERC ने इस भारी अधिभार को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने पिछले घाटे (FY 2024–25) के बोझ को एक ही साल में वसूलने के बजाय उसे आगामी कई वर्षों में बांट दिया है। आयोग ने कुल स्वीकृत टैरिफ वसूली को ₹12.75 बिलियन पर सीमित कर दिया और इसमें ₹770 मिलियन की सरकारी सब्सिडी को भी समायोजित किया।

उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर

संशोधित बिजली दरों में बहुत बड़ी बढ़ोतरी के बजाय श्रेणियों के आधार पर मामूली बदलाव किए गए हैं:

  • घरेलू उपभोक्ता (150 यूनिट तक): प्रति यूनिट 15 पैसे की मामूली बढ़ोतरी।
  • घरेलू उपभोक्ता (150 यूनिट से अधिक), सिंचाई और सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था: प्रति यूनिट 20 पैसे की बढ़ोतरी।
  • अन्य सभी श्रेणियां (वाणिज्यिक और औद्योगिक): प्रति यूनिट 35 पैसे की बढ़ोतरी।स्थिर शुल्क (Fixed Charges) को पहले की तरह ही डोमेस्टिक सिंगल-फेज और कमर्शियल यूजर्स के लिए कनेक्टेड लोड प्रति किलोवाट ($kW$) के आधार पर ही रखा गया है।

‘टाइम-ऑफ-डे’ (ToD) ग्रिड सुधार अनिवार्य

वित्तीय वर्ष 2026-27 के इस आदेश की सबसे बड़ी विशेषता छोटे घरेलू घरों और कृषि सिंचाई को छोड़कर बाकी सभी बड़ी श्रेणियों के लिए ‘टाइम-ऑफ-डे’ (ToD) टैरिफ प्रणाली को अनिवार्य बनाना है।

  • सोलर पीक डिस्काउंट (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक): दिन के समय जब ग्रिड में सौर ऊर्जा का उत्पादन सबसे अधिक होता है, उस दौरान बिजली का उपयोग करने पर सामान्य दर से 20% की छूट मिलेगी (यानी केवल 80% बिल लिया जाएगा)।
  • इवनिंग पीक सरचार्ज (शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक): इसके विपरीत, शाम के समय जब ग्रिड पर सबसे ज्यादा दबाव होता है, तब बिजली के इस्तेमाल पर प्रीमियम (अधिक) दरें लागू होंगी। इस व्यवस्था को सही ढंग से लागू करने के लिए राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने के काम में तेजी लाई जा रही है।
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