भारत ने ओडिशा तट पर लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया

Drdo On Monday Successfully Flight‑tested The Indigenously Developed Long Range Land Attack Cruise Missile (lrlacm)
Drdo On Monday Successfully Flight‑tested The Indigenously Developed Long Range Land Attack Cruise Missile (lrlacm) (PC: Social Media Sites)

ओडिशा में रक्षा विकास

बालासोर / नई दिल्ली — भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे और रक्षा स्वदेशीकरण (आत्मनिर्भर भारत) के अभियान को एक बड़ी मजबूती देते हुए, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया है।

यह सफल परीक्षण भारत की सटीक मारक क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो सशस्त्र बलों को दुश्मन के इलाके में गहराई से मौजूद उच्च-मूल्य वाली संपत्तियों (High-value assets) को नष्ट करने के लिए एक अत्यधिक सुरक्षित, बहुमुखी और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली प्रदान करता है।

LRLACM क्या है?

मिसाइल का परिचय

लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) एक स्वदेशी रूप से विकसित, सबसोनिक (ध्वनि की गति से धीमी), सतह से छोड़ी जाने वाली क्रूज मिसाइल है। विभिन्न डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और भारतीय रक्षा उद्योग के भागीदारों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई यह प्रणाली लंबी दूरी पर स्थित भूमि-आधारित लक्ष्यों पर सटीक निशाना लगाने के लिए बनाई गई है।

इस मिसाइल का परिचालन प्रोफाइल आधुनिक युद्धक्षेत्रों के अनुकूल है, जो मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए उन्नत कम-ऊंचाई वाली उड़ान क्षमताओं को एक अत्यधिक परिष्कृत मार्गदर्शन सूट (Guidance Suite) के साथ जोड़ता है।

प्रमुख तकनीकी विशेषताएं और क्षमताएं

तकनीकी विवरण

LRLACM अपनी मॉड्यूलर वास्तुकला, बहुमुखी तैनाती क्षमताओं और उन्नत प्रणोदन (Propulsion) के कारण एक विशिष्ट मिसाइल है:

  • कम ऊंचाई पर उड़ान (Terrain Skimming): यह मिसाइल सतह से सटकर, बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो इसके रडार क्रॉस-सेक्शन को काफी कम कर देती है। इससे दुश्मन के हवाई रक्षा प्रणालियों द्वारा इसके पकड़े जाने और बीच में ही मार गिराए जाने का जोखिम न्यूनतम हो जाता है।
  • उन्नत प्रणोदन इकाई: इसमें एक स्वदेशी टर्बोफैन या टर्बोजेट प्रोपल्शन यूनिट शामिल है, जो लंबी दूरी तक निरंतर और कुशल उड़ान की अनुमति देती है।
  • बहु-स्तरीय मार्गदर्शन प्रणाली: बीच रास्ते में मार्गदर्शन (Midcourse guidance) के लिए, LRLACM उपग्रह नेविगेशन द्वारा संवर्धित एक उन्नत इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) पर निर्भर करती है।
  • सटीक टर्मिनल जुड़ाव: अंतिम चरण में सटीक प्रहार के लिए, मिसाइल सटीक लक्ष्य जुड़ाव के लिए एक टर्मिनल सीकर और टेरेन-कंटूर मैचिंग (TERCOM) क्षमताओं का उपयोग करती है।
  • पेलोड: यह मिसाइल निर्दिष्ट उच्च-मूल्य वाले दुश्मन के बुनियादी ढांचे पर एक शक्तिशाली पारंपरिक हथियार (Conventional Warhead) ले जाने और गिराने के लिए तैयार की गई है।

परिचालन महत्व और रणनीतिक मूल्य

रणनीतिक प्रभाव

अपनी तकनीकी क्षमताओं के अलावा, LRLACM का सफल परीक्षण भारत की रक्षा स्थिति के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रभाव रखता है:

LRLACM कार्यक्रम का रणनीतिक प्रभाव;

1. आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा
– इसका स्वदेशी विकास भारी-सटीक प्रहार प्रणालियों के निर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है, जिससे विदेशी सैन्य आयात पर निर्भरता कम होती है।

2. परिचालन लचीलापन (Operational Flexibility)
– मॉड्यूलर सबसिस्टम के साथ निर्मित, LRLACM को विभिन्न लॉन्चर प्लेटफॉर्मों के अनुकूल डिज़ाइन किया गया है, जिससे इसे सेना के विभिन्न अंगों में तैनात किया जा सकता है।

3. वैश्विक निर्यात क्षमता
– इस कार्यक्रम की मॉड्यूलर प्रकृति LRLACM को नीतिगत प्रतिबंधों के अधीन, मित्र देशों को निर्यात के लिए एक मजबूत उम्मीदवार के रूप में स्थापित करती है।

ओडिशा तट पर इस परीक्षण के सफल समापन के साथ, भारत स्वदेशी लंबी दूरी की, सतह से सटकर चलने वाली क्रूज मिसाइल तकनीक रखने वाले देशों के एक विशिष्ट समूह में मजबूती से शामिल हो गया है।

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