जापान ने भारतीय आमों के आयात पर फिर लगाया प्रतिबंध; गुणवत्ता मानकों पर उठे सवाल

Japan Bans Indian Mango Imports
Japan Bans Indian Mango Imports (PC: Social Media Sites)

जापान सरकार ने भारत से आने वाले प्रीमियम आमों के आयात पर एक बार फिर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा रणनीतिक और वित्तीय झटका माना जा रहा है, जो पहले से ही पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण कम मांग और लॉजिस्टिक (यातायात) चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

यह निलंबन जापान में अत्यधिक मांग वाले भारत के सबसे लोकप्रिय प्रीमियम आमों को प्रभावित करता है, जिनमें अल्फोंसो (Alphonso), केसर (Kesar), लंगड़ा (Langra) और बंगनपल्ली (Banganapalli) शामिल हैं।

प्रतिबंध का मुख्य कारण: तकनीकी खामियां

जापान अपने कृषि क्षेत्र को बाहरी कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए दुनिया के सबसे सख्त ‘फाइटोसैनिटरी’ (वनस्पति स्वास्थ्य) नियमों का पालन करता है।

  • निरीक्षण में कमी: इस साल मार्च में जापान के ‘योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन’ (Yokohama Plant Protection Association) ने भारतीय आम उपचार केंद्रों की जांच की थी। इस दौरान उन्होंने पाया कि निर्यात से पहले आमों को कीटाणुमुक्त करने वाली ‘वेपर हीट ट्रीटमेंट’ (VHT) सुविधाओं और फ्यूमिगेशन (धूमन) प्रक्रियाओं में गंभीर तकनीकी कमियां थीं।
  • फ्रूट फ्लाई (फल मक्खी) का खतरा: जापानी अधिकारी ‘फ्रूट फ्लाई’ कीटों को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं, जो उनकी घरेलू फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारत की उपचार सुविधाओं में इन कमियों के दिखने के बाद, जापानी प्राधिकरण ने 25 मार्च, 2026 के बाद जारी किए गए भारतीय निरीक्षण प्रमाण पत्रों वाले शिपमेंट को स्वीकार करने से मना कर दिया है।

रणनीतिक प्रभाव और इतिहास की पुनरावृत्ति

भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जो सालाना लगभग 28 मिलियन मीट्रिक टन आम का उत्पादन करता है, जो वैश्विक आपूर्ति का 45% से 50% है। मात्रा के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा बाजार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है, जिसके बाद ब्रिटेन, नेपाल और अमेरिका का स्थान आता है।

हालांकि जापान भारत के लिए मात्रा के हिसाब से सबसे बड़ा बाजार नहीं है, लेकिन इस प्रतिबंध को भारतीय कृषि उत्पादों के लिए एक ‘प्रतिष्ठा के झटके’ (Reputational Setback) के रूप में देखा जा रहा है। निर्यातकों को डर है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के समग्र गुणवत्ता-नियंत्रण (Quality-Control) तंत्र पर सवाल उठ सकते हैं। इससे पहले 1986 में भी जापान ने ऐसे ही कीटों के कारण भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे कूटनीतिक और तकनीकी सुधारों के बाद 20 साल बाद यानी 2006 में हटाया जा सका था। 2026 में दोबारा प्रतिबंध लगना भारत के अंतरराष्ट्रीय निर्यात मानकों के लिए एक गंभीर रणनीतिक चिंता का विषय है.

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