मणिपुर की घाटियों और जंगलों में उतरेंगे सीआरपीएफ के ‘कोबरा’ कमांडो, गृह मंत्रालय ने दी मंजूरी

Crpf Cobra
Crpf Cobra (PC: Social Media Sites)

इम्फाल / नई दिल्ली:

मणिपुर में कानून व्यवस्था की स्थिति को पूरी तरह स्थिर करने और हिंसक झड़पों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रक्षा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने मणिपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की सबसे विशिष्ट और छापामार युद्ध में माहिर विंग—कोबरा (CoBRA – कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन) की दो बटालियनों की तैनाती को हरी झंडी दे दी है।

मणिपुर में जारी सुरक्षा चिंताओं के बीच यह पहला मौका है जब देश की सबसे प्रशिक्षित जंगल वॉरफेयर यूनिट को इस पूर्वोत्तर राज्य में ऑपरेशनल ड्यूटी पर लगाया जा रहा है।

बंगाल और असम से रवाना होगी फोर्स

सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने के लिए गृह मंत्रालय ने निम्नलिखित दो महत्वपूर्ण इकाइयों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पास किया है:

  • 207वीं कोबरा बटालियन: यह यूनिट पश्चिम बंगाल से बुलाई जा रही है।
  • 210वीं कोबरा बटालियन: इस यूनिट को असम से मोबिलाइज किया जा रहा है।

प्रत्येक बटालियन में करीब 1,000 कमांडो शामिल होते हैं, जो खुफिया जानकारी पर आधारित सटीक ऑपरेशन्स चलाने और उग्रवाद विरोधी अभियानों को अंजाम देने में पारंगत हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ये बल अगले कुछ हफ्तों में मणिपुर में पूरी तरह तैनात हो जाएंगे और वहां हिंसा फैलाने वाले सक्रिय सशस्त्र गुटों के खिलाफ केंद्रित कार्रवाई करेंगे।

नक्सल मोर्चे से पूर्वोत्तर की तरफ रणनीतिक झुकाव

साल 2008-09 में गठित कोबरा बल का मुख्य उद्देश्य मध्य और पूर्वी भारत के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों (रेड कॉरिडोर) में लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) का खात्मा करना था। वर्तमान में इस बल के पास कुल 10 बटालियन हैं, जो मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में तैनात रही हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि देश के आंतरिक हिस्सों में नक्सली गतिविधियों में आई भारी कमी और माओवादी नेटवर्क के कमजोर होने के चलते इन विशेष बलों को अन्य उभरती सुरक्षा चुनौतियों की ओर मोड़ा जा रहा है। अब जबकि नक्सल क्षेत्रों में काम मुख्य रूप से आईईडी (IED) का पता लगाने और सामान्य सुरक्षा तक सीमित रह गया है, सीआरपीएफ ने इन कमांडो को मणिपुर जैसे अशांत क्षेत्रों में शांति बहाल करने के काम में लगाने का फैसला किया है, जहां मई 2023 से शुरू हुए जातीय संघर्ष में 260 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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